पश्चिम मुखी घर का सच: ‘अस्त’ नहीं, ‘मस्त’ कर देगा! | West Facing Main Door Vastu
लेखक: गौरव गुप्ता
अक्सर जब भी हम नया घर खरीदने या बनाने की सोचते हैं, तो पश्चिम मुखी (West Facing) घर लेने से कतराते हैं। लोगों के मन में यह भ्रम बैठ गया है कि पश्चिम दिशा सूर्य के ‘अस्त’ होने की दिशा है, यहाँ अंधेरा जल्दी आता है, और इसलिए यह तरक्की के लिए शुभ नहीं है।
लेकिन क्या आप वास्तु शास्त्र का वो गहरा सच जानते हैं जो ज्यादातर लोग अनदेखा (Ignore) कर देते हैं?
नमस्कार साथियों! वास्तु गौरव (Vastu Gaurav) के इस ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज मैं आपके मन से पश्चिम दिशा का डर हमेशा के लिए निकाल दूंगा। वास्तु शास्त्र में पश्चिम दिशा ‘वरुण देव’ की है, जो लाभ और प्राप्तियों (Gains and Profits) के देवता हैं। आज हम जानेंगे कि कैसे पश्चिम दिशा आपको ‘अस्त’ नहीं बल्कि जीवन में ‘मस्त’ कर सकती है, और घर का असली “प्रॉफिट गेट” कहाँ होता है।
पश्चिम दिशा की ऊर्जा और उसका महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पश्चिम दिशा की ऊर्जा ‘आकाश’ (Space) और ‘धातु’ (Metal) तत्व से जुड़ी है। यह दिशा हमें हमारे कर्मों का फल देती है। यह दिशा ‘प्राप्ति’ (Gains) की है—यानी अगर आपका मुख्य द्वार सही जगह पर है, तो आपकी मेहनत का एक-एक पैसा वसूल होगा!
जिस तरह हर दिशा को 8 पदों में बांटा गया है, वैसे ही पश्चिम दिशा के 8 पद (W1 से W8) तय करते हैं कि आपके घर में बरकत होगी या बेवजह के खर्चे। आइए इन 32 Entrances में से पश्चिम दिशा के द्वारों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
पश्चिम दिशा के 8 पद (W1 से W8) और उनके परिणाम
अगर आपका घर पश्चिम मुखी है, तो आपके मुख्य द्वार का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस पद (Degree) पर स्थित है:
W1 (पितृ) – अशुभ: यहाँ द्वार होने से परिवार में मान-सम्मान की कमी आती है और यह धीरे-धीरे गरीबी की स्थिति पैदा करता है।
W2 (दौवारिक) – अशुभ: इस पद में मुख्य द्वार होने से घर के सदस्यों में आपसी समझ की कमी रहती है और व्यक्ति के करियर में अस्थिरता बनी रहती है।


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W3 (सुग्रीव) – अत्यधिक शुभ (प्रॉफिट गेट): यह घर का असली प्रॉफिट गेट है! यहाँ द्वार होने से अत्यधिक धन लाभ, व्यापार में भारी वृद्धि और जीवन में सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
W4 (पुष्पदंत) – अत्यधिक शुभ (प्रॉफिट गेट): यह पद भी ‘अमृत पद’ के समान है। यह अतुलनीय समृद्धि, शानदार संतान सुख और जीवन में गजब की स्थिरता देता है।

W5 (वरुण) – मध्यम/शुभ: यह द्वार व्यक्ति को आध्यात्मिक झुकाव देता है। यह शुभ है, लेकिन कभी-कभी यह अत्यधिक खर्चों का कारण भी बन सकता है।
W6 (असुर) – अशुभ: इस पद में द्वार मानसिक तनाव, हर कार्य में देरी और डिप्रेशन का कारण बन सकता है।

W7 (शोष) – अशुभ: नाम के अनुरूप, यह द्वार शारीरिक कमजोरी, स्वास्थ्य समस्याएं और धन का सूखना (यानी जमा पूंजी खर्च होना) दर्शाता है।
W8 (पापयक्ष्मा) – अत्यधिक अशुभ: यह पश्चिम दिशा का सबसे खराब द्वार है। यह गंभीर बीमारी, कानूनी अड़चनें और बार-बार होने वाले भारी नुकसान का कारण बनता है।

निष्कर्ष: क्या पश्चिम मुखी घर खरीदना चाहिए?
साथियों, कहानी का सार यह है कि पश्चिम दिशा को बेकार या अशुभ समझने की भूल कभी न करें। अगर आप घर बना रहे हैं या खरीद रहे हैं, तो कोशिश करें कि आपका मुख्य द्वार W3 (सुग्रीव) या W4 (पुष्पदंत) पद पर हो।
यकीन मानिए, अगर द्वार सही पद पर है, तो आपको वो सफलता और धन मिल सकता है जो शायद उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा भी न दे पाए।
दिशा कोई भी खराब नहीं होती, जरूरत है तो बस सही पद और उसकी डिग्री पहचानने की। अगर आपको अपने घर की सही डिग्री चेक करनी है, तो आप हमारे यूट्यूब चैनल ‘वास्तु गौरव’ पर जाकर डिटेल वीडियो देख सकते हैं।
